श्री बद्रीनाथ जी की आरती – Badrinath ji ki Aarti

श्री बद्रीनाथ जी की आरती (Badrinath ji ki Aarti hindi mp3)

Badrinath ji ki Aarti – श्री बदरीनाथ धाम को हिंदुओं का तीर्थ माना जाता है, लेकिन आप यकीन नहीं करोगे कि मंदिर में नित्य सुबह-शाम जो आरती (Badrinath Aarti) गाई जाती है, उसे 151 साल पहले एक मुस्लिम कवि फकरुद्दीन (बदरुद्दीन) ने लिखा (Badrinath Aarti Lyrics) था। तब से भगवान बदरी विशाल की पूजा परंपराओं की शुरुआत इसी आरती (Badrinath ki Aarti) के साथ होती है।

श्री बदरीनाथ धाम देश ही नहीं, पूरी दुनिया में हिंदुओं के तीर्थ के रूप में विख्यात है। प्रतिवर्ष देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु यहां भगवान बदरी विशाल के दर्शनों को पहुंचते हैं। वैसे तो यह धाम अपने-आप में विलक्षण है, किंतु सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक के रूप में इसकी विशिष्ट पहचान है। इसकी वजह है धाम में गाई जाने वाली संस्कृत में लिखी आरती। जिसके बोल हैं, ‘पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम, निकट गंगा बहति निर्मल श्री बदरीनाथ विश्वंबरम।’

द्रीनाथ जी की आरती – Badrinath ji ki Aarti

पवन मंद सुगंध शीतल,
हेम मन्दिर शोभितम्।
निकट गंगा बहत निर्मल,
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

शेष सुमिरन, करत निशदिन,
धरत ध्यान महेश्वरम्।
वेद ब्रह्मा करत स्तुति
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

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इन्द्र चन्द्र कुबेर दिनकर,
धूप दीप निवेदितम्।
सिद्ध मुनिजन करत जय जय
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

शक्ति गौरी गणेश शारद,
नारद मुनि उच्चारणम्।
योग ध्यान अपार लीला
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

यक्ष किन्नर करत कौतुक,
गान गंधर्व प्रकाशितम्।

लक्ष्मी देवी चंवर डोले
(श्री भूमि लक्ष्मी चँवर डोले)
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

कैलाशमे एक देव निरंजन,
शैल शिखर महेश्वरम।
राजा युधिष्टिर करत स्तुती,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्॥

यह बद्रीनाथ पंच रत्न,
पठन पाप विनाशनम्।
नरनारायण तप निरत
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

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