आरती श्री बृहस्पति देवता की – Brihaspati Dev ki Aarti

 श्री बृहस्पति देवता (Brihaspati Dev ki Aarti Mp3)

Brihaspati Dev ki Aarti – गुरुवार यानी बृहस्पतिवार (Thursday Vrat Katha Aarti) के दिन भगवान विष्णु और देव गुरु बृहस्पति की पूजा के बाद आरती (Brihaspativar ki Aarti) का विधान है।

श्री बृहस्पति देवता – Brihaspati Dev ki Aarti

जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा ।

छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।

जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।

सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।

प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।

पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।

विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।

जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

https://youtu.be/-A4anK0e76Q

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