Meera Bai Bhajan

दीनन दुख हरन देव

दीनन दुख हरन देव, सन्तन सुखकारी ।

अजामील गीध व्याध, इनमें कहो कौन साध,

पंछी हूँ पद पढ़ात, गनिका-सी तारी ।

ध्रुव के सिर छत्र देत, प्रहलाद कहँ उबार देत,

भगत हेत बांध्यो सेत, लंकपुरी जारी ।

तंदुल देत रीझ जात, सागपात सों अघात,

गिनत नहीं जूँठे फल, खाटे-मीठे-खारी ।

गज को जब ग्राह ग्रस्यो, दुस्सासन चीर हरयो,

सभा बीच कृष्ण-कृष्ण द्रौपदी पुकारी ।

इतने में हरि आइ गये, बसनन आरूढ़ भये,

सूरदास द्वारे ठाढ़ो, आँधरो भिखारी ।

About the author

Lyricsbug

Lyricsbug.in is platform for Devotional music lovers where you can get Latest Krishna Bhajan, Shiv Bhajan, Hanuman Bhajan, Aarti & Chalisa lyrics with Many More Hindu God & Goddess Bhajans in vast range .

क्या आपको हमारी पोस्ट पसंद आयी ?