को विरहिणी को दुःख जाणै हो

16

को विरहिणी को दुःख जाणै – ko Birhini ko Dhukh jane Mp3 Download

को विरहिणी को दुःख जाणै हो ।।टेक।।

मीराँ के पति आप रमैया, दूजा नहिं कोई छाणै हो

रोगी अन्तर वैद बसत है, वैद ही ओखद जाणै हो।

सब जग कूडो कंटक दुनिया, दरध न कोई पिछाणै हो

को विरहिणी को दुःख जाणै हो ।।टेक।।

जा घट बिरहा सोई लखी है, कै कोई हरि जन मानै हो।

विरह कद उरि अन्दर माँहि, हरि बिन सुख कानै हो।

को विरहिणी को दुःख जाणै हो ।।टेक।।

मीराँ के पति आप रमैया, दूजा नहिं कोई छाणै हो

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here