प्राचीन भजन लावनी

15

प्राचीन भजन लावनी भजन-Prachin Bhajan Lawani In Hindi Mp3 Download

Prachin Bhajan Lawani Lyrics

लावण हम दम का ध्यान चुपचाप किया करते है बिन जिब्हा अजपाजाप किया करते हैं

बिन मुह के हरदम सोहं सोहं बोले बिन नयन के देखे सबकी आँखे खोले

हम बिना पाँव के तीन लोके में डोले बिन हाथ तराजुं तीन लोक को तोले

यह अपना भजन हम आप किया करते है बिन जिव्हा अजपाजाप किया करते है

बिन कान के सबकी सुनते न्यारी न्यारी बिन नासा के हम लेते सुगंध सारी

बिन इन्द्री के हम भोग भोगते भारी नित भोग करें और बने रहे ब्रह्मचारी

होता है धरम जब पाप किया करते है बिन जिब्हा अजपाजाप किया करते है

बिन बादल बिजली चमके बिन अम्बर के बिन बारिस निस दिन अमृत वर्षा बरसे

बिन मुख के सुगरा पीवे नुगरा तरसे बिन सूरत जिसकी डोर लगी हर हर से

आपे से आप मिलाप किया करते है | बिन जिब्हा अजपाजाप किया करते है

बिन बादल बिजली चमके हरदम गाजे बिन साज जहां पर अनहद बाजा बाजे

बिन सेज देह बिन पुष्प हमी विराजे यह बिना गुरु के भरम कभी नहीं भागे

बिन कंठ के हम आलाप किया करते है बिन जिव्हा अजपाजाप किया करते है

बिन अगनी के जहा बृहत जोत जगती है | वो बिना तेल और बिन बाती जलती है |

तुम लाख हिलावो कभी नहीं हिलती है जहां शीतल मन्द सुगंध पवन चलती है

यहां भजन का हम परताप किया करते है बिन जिव्हा अजपाजाप किया करते है |

बिन कंठ के हम तो राग रागनी गांवे बिन हाथो के बाजे सभी बजावे

यह सबद सदा सुरजगिरी के मन भावे रसाल गिरी कह उल्टा भेद बतावे

अज्ञानी सुन प्रलाप किया करते है | बिन जिव्हा अजपाजाप किया है

हमदम का ध्यान चुपचाप किया करते है बिन जिव्हा अजपा जाप किया आ ………..ओम ओम हरिओ

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here