सखी मेरी नींद

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सखी मेरी नींद (Sakhi Meri Nind bhajan in hindi Mp3)

सखी मेरी नींद नसानी हो।

पिवको पंथ निहारत सिगरी रैण बिहानी हो।

सखियन मिलकर सीख द मन एक न मानी हो।

बिन देख्यां कल नाहिं पड़त जिय ऐसी ठानी हो।

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अंग-अंग ब्याकुल भ मुख पिय पिय बानी हो।

अंतर बेदन बिरहकी कोई पीर न जानी हो।

ज्यूं चातक घनकूं रटै मछली जिमि पानी हो।

मीरा ब्याकुल बिरहणी सुध बुध बिसरानी हो।

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