सूर्य देव की आरती – Surya Dev ki Aarti

सूर्य देव आरती (Surya Dev ki Aarti Mp3 Download)

Surya Bhagwan ki Aarti – रविवार के दिन इस आरती को करने से होते हैं सूर्य देव प्रसन्न (Surya Dev ki Aarti).

सूर्य देव आरती – Surya Dev ji ki Aarti

आदित्य उदय होत उजियारा , जग पालन करता |

कीड़ी कण मण कुंजर , सबका उदर भरता || १||

कृष्ण को कुंवर साम्ब , करि भक्ति रवि शरणों लियो |

कृष्ट निवार दिवाकर , कंचन तन कियो || २||

भानु तन से भया मग , भोजक पूजा हित प्यारा |

वेद पुराण बखाने , जाने जग सारा ||३||

काश्यप सुत सूरज की , आरती जो कोई गावे |

शंख ध्वनी कर जन मन , वांछित फल पावे ||४||

भोजन विप्र “हरी ” रवि, तोरी शरणागत आयो |

जम्बू दवीप जोधाने , प्रभु दरसन पायो ||५||

(रचयिता – स्वर्गीय शाकद्वीपी ब्राह्मण हरिनारयांजी , जोधपुर )

आरती श्री सूर्यदेव जी की Aarti Shri Surya Dev Ji Ki

जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव।

राजनीति मदहारी शतदल जीवन दाता।

षटपद मन मुदकारी हे दिनमणि ताता।

जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।

नभमंडल के वासी ज्योति प्रकाशक देवा।

निज जनहित सुखसारी तेरी हम सब सेवा।

करते हैं रवि देव, जय जय जय रविदेव।

कनक बदनमन मोहित रुचिर प्रभा प्यारी।

हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।।

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