रविवार की आरती – Ravivar ki Aarti

रविवार आरती (Surya Dev ki Aarti Mp3 Download)

Surya Bhagwan ki Aarti – रविवार के दिन इस आरती (Ravivar ki Aarti) को करने से होते हैं सूर्य देव प्रसन्न तो चलिए जाने है श्री सूर्यदेव की आरती Surya Dev ji ki Aarti ….

रविवार आरती – Raviwar ki Aarti

कहुँ लगि आरती दास करेंगे ,सकल जगत जाकी जोत बिराजेसात ।।

समुद्र जाके चरणनि बसे , कहा भयो जल कुम्भ भरे हो राम ।

कोटि भानु जाके नख की शोभा ,कहा भयो मन्दिर दीप धरे हो राम ।

भार अठारह रामा बलि जाके , कहा भयो षिर पुश्पधरे हो राम ।

छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे, कहा भयो नैवेद्य धरे हो राम ।

अमित कोटि जाके बाजा बाजे ,कहा भयो झनकार करे हो राम ।

चार वेद जाके मुख की षेभा ,कहा भयो बह्य वेद पढ़े हो राम ।

षिव सनकादि आदि ब्रह्यादिक ,नारद हुनि जाको ध्यान धरें हो राम ।

हिम मंदार जाको पवन झकोरे ,कहा भयो षिव चवँर दुरे हो राम ।

लख चैरासी वन्दे छुड़ाये ,केवल हरियष नामदेव गाये ।। हो राम ।।

सर्व मनोकामनाओ की पूर्ति हेतु रविवार का वर्त श्रेस्ठ है |

इस वर्त की विधि इस प्रकार है:

— प्रात: काल सनानादी से निवृत हो स्वछ वस्त्र धारण करे |

— शांतचित होकर परमात्मा का स्मरण करे |

— भोजन इक समय से ज्यादा नहीं करना चहिये |

— भोजन तथा फलाहार सूर्य के प्रकाश रहते कर लेना चहिये |

— यदि निराहार रहने पर सूर्ये छिप जये तो दूसरे दिन सूर्ये उदय हो जाने पर अर्ध्ये देने के बाद भोजन करना चहिये |

— व्रत के अंत में व्रत कथा सुननी चाहिये |

— व्रत के दोरान नमकीन व तेलयुक्त भोजन कदापि ग्रहण न करें |

— इस व्रत के करने से मान – सम्मान बढता है तथा शत्रुओं का सये होता है |

— आँखों को पीड़ा के अतिरिक्त अन्य सब पीड़ाए दूर होती हैं |

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