विन्ध्येश्वरी जी की आरती – Vindhyavasini Mata ki Aarti

विन्ध्येश्वरी जी आरती (Mata ki Aarti Mp3 Download)

Mata ki Aarti Lyrics – मां विंध्यवासिनी एक ऐसी जागृत शक्तिपीठ है जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी रहेगा (Maa Vindhyavasini Aarti Lyrics) यहां देवी के 3 रूपों का सौभाग्य भक्तों को प्राप्त होता है. मां के वैभव से सभी की मनोकामना पूरी होती है. भक्तों को सुख समृद्धि और शांति मिलती है, यही वजह है कि मां के दरबार में दूर दूर से भक्त आते हैं, मां की महिमा गाते हैं और झोली में खुशियां भर कर घर ले जाते हैं.

Mata ki Aarti – विन्ध्येश्वरी जी आरती

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, कोई तेरा पार न पाया।

पान सुपारी ध्वजा नारीयल, ले तेरी भेंट चढ़ाया।

सुवा चोली तेरी अंग विराजे, केसर तिलक लगाया ।

नंगे पग मां अकबर आया, सोने का छत्र चढ़ाया।

ऊँचे पर्वत बन्यो देवालय, नीचे शहर बसाया।

सतयुग,द्वापर,त्रेता मध्ये, कलयुग राज सवाया।

धूप दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगाया ।

ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गाया, मनवांछित फ़ल पाया ।

Leave a Comment